उज्जैन टाइम्स ब्यूरो
उज्जैन टाइम्स | एक्सप्लेनर
देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI (Unified Payments Interface) को लेकर इन दिनों यह चर्चा तेज है कि क्या भविष्य में UPI भुगतान पर शुल्क (MDR) लगाया जा सकता है। सरकार द्वारा पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में प्रस्तावित संशोधन के बाद यह बहस और भी तेज हो गई है। हालांकि, वर्तमान स्थिति को समझना बेहद जरूरी है।
सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान व्यवस्था में कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर Merchant Discount Rate (MDR) स्वतः लागू नहीं होता। प्रस्तावित संशोधन के बाद सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह अधिसूचना (Notification) जारी कर यह तय करे कि कौन-से डिजिटल भुगतान माध्यम MDR से मुक्त रहेंगे और किन पर भविष्य में शुल्क लागू किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य तत्काल शुल्क लगाना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए कानूनी लचीलापन (Legal Flexibility) तैयार करना है।
उत्तर है—नहीं।
प्रस्तावित संशोधन में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि UPI पर तत्काल MDR लगाया जाएगा। न ही इसमें MDR की दर, लागू होने की तारीख या किन ट्रांजैक्शनों पर शुल्क लगेगा, इसका कोई उल्लेख है।
इसलिए फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पूरी तरह पहले की तरह ही निःशुल्क है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में सरकार बड़े मूल्य वाले UPI लेनदेन पर MDR लागू करने पर विचार कर सकती है। चर्चाओं में ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन का उल्लेख किया जा रहा है, जबकि छोटे व्यापारियों को छूट दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
वैश्विक ब्रोकरेज Bernstein के अनुसार ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन कुल UPI लेनदेन की संख्या का केवल 4% हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन मूल्य का लगभग 70% हिस्सा इन्हीं से आता है।
हालांकि, यह केवल संभावित परिदृश्य है। सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया है।
यह समझना आवश्यक है कि Merchant Discount Rate (MDR) उपभोक्ता द्वारा नहीं, बल्कि व्यापारी (Merchant) द्वारा भुगतान की जाने वाली सेवा शुल्क है।
अर्थात यदि भविष्य में MDR लागू भी होता है, तो QR Code स्कैन करते समय ग्राहक के बैंक खाते से स्वतः कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं काटा जाएगा। हालांकि, व्यापारी भविष्य में इस लागत का कुछ हिस्सा वस्तुओं या सेवाओं की कीमत में जोड़ते हैं या नहीं, यह पूरी तरह उनके व्यावसायिक निर्णय पर निर्भर करेगा।
भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है।
जुलाई 2026 में ही UPI के माध्यम से लगभग 23.66 अरब (23.66 Billion) ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य ₹29.88 लाख करोड़ रहा। इतने विशाल नेटवर्क के संचालन, सुरक्षा, तकनीकी उन्नयन और भुगतान अवसंरचना के लिए निरंतर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
सरकार वर्तमान में विभिन्न प्रोत्साहन (Incentive) योजनाओं के माध्यम से इस इकोसिस्टम को सहयोग देती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अधिक टिकाऊ वित्तीय मॉडल की आवश्यकता पड़ सकती है।
फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने अभी UPI पर कोई शुल्क लागू नहीं किया है।
हालांकि, प्रस्तावित संशोधन से सरकार को भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है। यदि ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है, तो उसकी दर, दायरा और लागू होने की प्रक्रिया अलग से आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से घोषित की जाएगी।
(अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी एवं प्रस्तावित विधायी संशोधनों पर आधारित विश्लेषण है। अंतिम निर्णय सरकार की अधिसूचना एवं संसद द्वारा पारित कानून पर निर्भर करेगा।)**
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