उज्जैन टाइम्स ब्यूरो
GI टैग: भारत की पारंपरिक विरासत अब बन रही ग्लोबल ब्रांड
नई दिल्ली। भारत की पहचान केवल उसकी विविध संस्कृति और परंपराओं से ही नहीं, बल्कि उन अनगिनत उत्पादों से भी है जिन्हें पीढ़ियों से कारीगर, बुनकर और किसान अपनी मेहनत और पारंपरिक ज्ञान से तैयार करते आ रहे हैं। अब इन्हीं स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने में Geographical Indication (GI) टैग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
GI टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है जिसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशिष्ट विशेषता किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। यह टैग उत्पाद की उत्पत्ति और पारंपरिक पहचान का प्रमाण बनता है तथा उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की पहचान करने में मदद करता है।
GI टैग का महत्व केवल किसी उत्पाद की कानूनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार पहचान, प्रीमियम बाजारों तक पहुंच और अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलता है। भारत के वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, GI पहचान ग्रामीण कारीगरों की आय में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि में मदद कर सकती है। इससे पारंपरिक शिल्प और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए पारंपरिक ज्ञान और कौशल को संरक्षित करने में मदद मिलती है।
GI टैग से मिलने वाले आर्थिक लाभ का उदाहरण मुजफ्फरनगर के गुड़ से देखा जा सकता है। GI पहचान मिलने के बाद इसे प्रीमियम उत्पाद के रूप में बाजार में पहचान मिली। वर्ष 2025 में ब्रिजनंदन एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने 30 मीट्रिक टन गुड़ बांग्लादेश को निर्यात किया। इससे 545 सदस्यों वाली किसान उत्पादक कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिली और स्थानीय स्तर पर उत्पादित गुड़ के लिए अतिरिक्त मूल्य सृजित हुआ।
भारत में GI उत्पादों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। दिसंबर 2025 तक देश में 800 से अधिक GI उत्पाद पंजीकृत थे और वर्ष 2014 के बाद 607 GI प्रदान किए जा चुके हैं।
इनमें हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, खाद्य पदार्थ, विनिर्मित वस्तुएं और प्राकृतिक उत्पाद शामिल हैं। हस्तशिल्प श्रेणी में 445 उत्पाद तथा कृषि क्षेत्र में 251 उत्पाद पंजीकृत हैं।
GI उत्पादों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश 81 GI उत्पादों के साथ देश में सबसे आगे है। इसके बाद तमिलनाडु के 76 और महाराष्ट्र के 55 GI उत्पाद हैं। मध्य प्रदेश के लिए भी GI विरासत महत्वपूर्ण है। PIB Research Note में पन्ना डायमंड को देश के GI-टैग प्राप्त प्राकृतिक उत्पादों में शामिल किया गया है।
भारत में GI टैग प्राप्त करने वाला पहला उत्पाद दार्जिलिंग चाय था। इसके बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक हस्तशिल्प, कृषि और खाद्य उत्पादों को GI संरक्षण मिलने लगा।
भारत में GI पंजीकरण और संरक्षण Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत किया जाता है। GI व्यवस्था 2003 में लागू हुई और पंजीकरण की शुरुआत 2004-05 में हुई।
केंद्र सरकार GI उत्पादों को बाजार और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कई पहल कर रही है। इनमें PM Ekta Mall, One Station One Product (OSOP), GI Tourism Trails, MSME Innovative Scheme और APEDA के माध्यम से निर्यात प्रोत्साहन प्रमुख हैं। GI उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है। जून 2026 में असम में Muga Silk Trail, Silk Tourism Park और Muga Utsav की घोषणा की गई, जिससे पारंपरिक उत्पादों को पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में पहल हुई है।
भारतीय GI उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार भी तेजी से खुल रहे हैं। PIB Research Note के अनुसार, कर्नाटक के GI फलों ने मालदीव में किसानों को 40-50 प्रतिशत अधिक रिटर्न दिलाया, जबकि तेजपुर लीची के निर्यात से दुबई में उत्पादकों को लगभग 10 प्रतिशत अधिक कीमत मिली। सलैम सागो को कनाडा और जोहा चावल को ब्रिटेन तथा इटली जैसे बाजारों में नए अवसर मिले हैं।
भारत अब GI उत्पादों को केवल विरासत के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, रोजगार, निर्यात और वैश्विक ब्रांडिंग के माध्यम के रूप में देख रहा है।
सरकार ने वर्ष 2030 तक 10,000 GI पंजीकरण का लक्ष्य रखा है। यदि GI उत्पादों को आधुनिक ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स, पर्यटन और निर्यात के साथ जोड़ा जाता है, तो भारत की पारंपरिक संपदा आने वाले वर्षों में बड़ी आर्थिक ताकत बन सकती है।
GI टैग किसी उत्पाद पर लगा महज एक प्रमाणपत्र नहीं है। यह किसी क्षेत्र की पहचान, कारीगर की मेहनत, किसान की उपज और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का सम्मान है। भारत के लिए GI टैग स्थानीय विरासत को वैश्विक बाजार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण पुल बन रहा है। जरूरत है कि हम इन उत्पादों को केवल खरीदें ही नहीं, बल्कि उनकी असली पहचान को समझें और स्थानीय उत्पादकों को उनका उचित मूल्य दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं।
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