उज्जैन टाइम्स ब्यूरो
1. बहुत ज़्यादा क्रिकेट : IPL + द्विपक्षीय सीरीज़ + ICC इवेंट्स + दुनिया भर की फ़्रैंचाइज़ी लीग्स. दर्शकों में थकान होना एक असलियत है।
2. टूर्नामेंट की लंबी अवधि: पहले के IPL सीज़न "इवेंट्स" जैसे लगते थे। अब यह सीज़न लगभग 2 महीने तक चलता है।
3. ध्यान का बंटना: Reels, YouTube, OTT, गेमिंग, इन्फ़्लुएंसर्स समय के लिए आपस में होड़ करते हैं। युवा दर्शक अब लगातार पूरे मैच नहीं देखते हैं।
4. एकतरफ़ा मैच: सपाट पिचें और 220+ के स्कोर रोमांच को कम कर देते हैं।दर्शक अक्सर सिर्फ़ बल्लेबाज़ी के जलवे देखने के बजाय रोमांचक मुक़ाबलों को ज़्यादा पसंद करते हैं।
5. टीम की पहचान का कमज़ोर होना : खिलाड़ियों के बार-बार ट्रांसफ़र होने से लंबे समय तक बना रहने वाला भावनात्मक जुड़ाव कम हो जाता है।
6. विज्ञापन बाज़ार में सुस्ती : दुनिया भर के ब्रांड मार्केटिंग पर होने वाले खर्च को लेकर ज़्यादा सतर्क हो गए हैं। महंगे मास-TV कैंपेन के बजाय डिजिटल टारगेटिंग को ज़्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।